Thursday, September 4, 2014

घर में शादी -ब्याह हो .........

घर में शादी -ब्याह हो ,मुंडन हो , जन्मोत्सव हो या कोई भी शुभ अवसर हो ,हलवाई के  बैठते ही पूरे 
घर का माहौल गमगमाने लगता है ,रौनक एकदम चरम सीमा पर पहुँच जाती है  . लोग-बाग अकेले ,दुकेले ,सपरिवार आते रहते हैं ,खाते-पीते ,हँसते-गाते ,मौज-मस्ती करते हैं…… न प्लेटों की गिनती न मेहमानों की लेकिन …… ये 'पर -प्लेट' वाली संस्कृति बड़ी बेरहम होती है  . मेहमानों की सूची में लगातार कतर-ब्योंत करती रहती है और अंतत: कितनों का नाम खारिज कर देती है  . बेचारी 'पर-प्लेट' कितनी मजबूर होती है  ……. अपनों को भी गैर बना देती है  ……. 

8 comments:

  1. सचमुच बहुत बेरहम है यह आधुनिक संस्कृति...जबकि धन पहले से ज्यादा ही लगता है

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  2. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (05.09.2014) को "शिक्षक दिवस" (चर्चा अंक-1727)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

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  3. बेरहम तो है ही--प्लेटों की रीति--खाने भी नहीं देती भर पेट.

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  4. बिल्‍कुल सच कहा आपने ....

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