Thursday, July 6, 2017

उम्र ..

मैं ..
जगह-जगह
बिताये हुये समय की
एक लम्बी
फ़ेहरिस्त बनाती गयी..
और ..
इस जोड़ -घटाव
गुणा-भाग के
हिसाब -किताब में
उम्र , खरीद-फ़रोख्त
करती हुई
चुपचाप निकलती गयी..

7 comments:

  1. यही है जीवन की पूरी कहानी

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (07-07-2015) को "शब्दों को मन में उपजाओ" (चर्चा अंक-2660) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  3. इस खरीद फरोख्त में उम्र बढ़ती जाती है और वक़्त कम होता जाता है

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  4. क्या कहने, बहुत सुंदर

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  5. अब भी वक्त बचा है..

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  6. जी ....होता सभी के साथ यही है

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  7. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (24-07-2017) को "क्‍यों माना जाए तीन तलाक" (चर्चा अंक 2676) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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