Sunday, February 9, 2014

कि ऋतु वसंत है .......

रच लें हथेलियों पर
केसर की पखुड़ियाँ.....
बाँध लें साँसों में
जवाकुसुम की
मिठास.....
सजा लें सपनों में
गुलमोहर के
चटकीले रंग……
बिखेर लें
कल्पनाओं में
जूही की कलियाँ......
कि ऋतु वसंत है .......

15 comments:

  1. रंग बिरंगे फूलों का मौसम ऋतु वसंत मनभावन…
    सुन्दर !!

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  2. बेहतरीन अभिवयक्ति.....

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  3. बात फूलों की रात फूलों की
    अब चली है बारात फूलों की

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  4. भावपूर्ण अभिव्यक्ति |
    आशा

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  5. खूबसूरत अभिव्यक्ति...

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  6. कुसुमित अभिव्यक्ति ...!!बहुत सुंदर ...!!

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  7. खूबसूरत अभिव्यक्ति...

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  8. लाजबाब,बेहतरीन अभिव्यक्ति .!

    RECENT POST -: पिता

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  9. भावो का सुन्दर समायोजन......

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  10. बहुत दिनों के बाद आपके पोस्ट पर आया हूं। प्रस्तुति काफी अच्छी लगी। मेरे नए पोस्ट "सपनों की भी उम्र होती है",पर आपका इंतजार रहेगा।

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  11. आपकी बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति
    --
    आपकी इस अभिव्यक्ति की चर्चा कल सोमवार (03-03-2014) को ''एहसास के अनेक रंग'' (चर्चा मंच-1540) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर…!

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  12. बढ़िया स्वागत वसंत का ....

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