Saturday, May 12, 2012

वह ममता.......

वह ममता कितनी प्यारी   थी ,
वह आँचल कितना सुन्दर था,
जिसके   कोने  की    गिरहों में
थी  मेरी   ऊँगली बंधी     हुई .
तब ........
बित्ते       भर   की खुशियाँ थी,
ऊँगली   भर की    आकांछा थी,
उस आँचल की   उन गिरहों में
बस,अपनी सारी दुनिया    थी.....

31 comments:

  1. बित्ते भर की खुशियाँ थी,
    ऊँगली भर की आकांछा थी,
    उस आँचल की उन गिरहों में
    बस, अपनी सारी दुनिया थी.....

    भावों से भरी खुबशुरत पंक्तियाँ,....लाजबाब रचना

    MY RECENT POST ,...काव्यान्जलि ...: आज मुझे गाने दो,...

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  2. माँ के प्यार में निस्वार्थ भाव को समेटती आपकी खुबसूरत रचना.....

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  3. क्या बात है । अति प्रशंसनीय । मेरे पस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  5. मां का प्‍यार था वह।

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  6. सच वह ममता कितनी प्यारी थी

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  7. मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं...

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  8. बहुत सुन्दर लोग कहते हैं आज माँ का खास दिन है पर माँ का दिन कब खास नहीं होता ? माँ को हमारा सलाम सुन्दर रचना |

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  9. महतारी दिवस की बधाई

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  10. माँ ने जिन पर कर दिया, जीवन को आहूत
    कितनी माँ के भाग में , आये श्रवण सपूत
    आये श्रवण सपूत , भरे क्यों वृद्धाश्रम हैं
    एक दिवस माँ को अर्पित क्या यही धरम है
    माँ से ज्यादा क्या दे डाला है दुनियाँ ने
    इसी दिवस के लिये तुझे क्या पाला माँ ने ?

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  11. बित्ते भर की खुशियाँ थी,
    ऊँगली भर की आकांछा थी,
    उस आँचल की उन गिरहों में
    बस,अपनी सारी दुनिया थी.

    मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं...

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  12. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति.

    आपको मातृदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

    माँ है मंदिर मां तीर्थयात्रा है,
    माँ प्रार्थना है, माँ भगवान है,
    उसके बिना हम बिना माली के बगीचा हैं!

    संतप्रवर श्री चन्द्रप्रभ जी

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  13. माँ के आँचल में ही सारी दुनिया समाई थी कम शब्दों में कितनी बड़ी बात अति सुन्दर मृदुला जी बधाई

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  14. मृदला जी आपकी रचनाओं की यह खूबसूरती मुझे बहुत अच्छी लगती है, कि आप बात बिम्बों के माध्यम से बड़ी खूबसूरती से कह देती हैं।

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  15. माँ को नमन ..... सच में सारी दुनिया उसी में समाई रहती है..... अति सुंदर रचना

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  16. तब की छोटी सी दुनिया बेहद प्यारी थी...
    सुंदर रचना!

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  17. बित्ते भर की खुशियाँ थी,
    ऊँगली भर की आकांछा थी,
    ..सच जब बच्चे थे तब वे दिन कितने अच्छे थे.. थोड़ी खुशियाँ में ही सारा जहाँ होता है और अब..पूछो मत ...
    बहुत सुन्दर कोमल भाव ...

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  18. बित्ते भर की खुशियाँ थी,
    ऊँगली भर की आकांछा थी,
    उस आँचल की उन गिरहों में
    बस,अपनी सारी दुनिया थी.....

    चाहे कितने ही बड़े क्यूँ न हो जाएँ आज भी वो आँचल हमारी सारी दुनिया समेटे हुए है, बड़े ही प्यार से. सुन्दर प्रस्तुति.

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  19. बहुत प्यारी , निश्चल कविता ...!

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  20. सच में माँ शब्द्में सारी दुनिया समाई हुई है..सुन्दर मासूम रचना..

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  21. थी तो बित्ते भर की पर आज भी सबसे ज्यादा उसे ही पाने का दिल करता है ... निश्छल रचना ...

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  22. बित्ते भर की खुशियाँ थी,
    ऊँगली भर की आकांछा थी,
    उस आँचल की उन गिरहों में
    बस,अपनी सारी दुनिया थी.....
    फिर भी कितनी विस्‍तृत थी हमारे प्‍यार की दुनिया ... अनुपम प्रस्‍तुति।

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  23. बहुत सुंदर ....

    बित्ते भर की खुशियाँ थी,
    ऊँगली भर की आकांछा थी,... इसी में सारी दुनिया जहां की खुशियाँ मिल जाती थीं

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  24. क्या खूब!
    कभी बित्ते भर की खुशियों से उछल पड़ते थे और आज.. हंसी आती है.. पर ज़िंदगी इसी का नाम है!

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  25. उस आँचल की उन गिरहों में
    बस,अपनी सारी दुनिया थी....bahut accha.....

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  26. उम्दा, बेहतरीन अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई...

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  27. बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण रचना....:-)

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