Monday, September 24, 2012

हर कोई एक तरीका ढूँढ लेता है जीने का .......

हर कोई
एक तरीका ढूँढ  लेता है
जीने का .......
उठने का ,बैठने का ,
जागने का ,
सोने का ,हँसने का ,
रोने का,
खाने का और पीने का।
कभी मन से,कभी
बेमन से ,
कभी जाने, कभी
अनजाने,
रोज़मर्रा की क्रिया
प्रक्रिया से
बंधा हुआ........
रूठते ,मनाते ,
बोलते ,न बोलते ,
लुढ़कते ,
फिसलते ,गिरते ,
संभलते ,
घूमता रहता है
पहिये की तरह ,
वृत्ताकार गोलाई पर ,
घड़ी की सूईयों को
ताकता हुआ ,
घटती -बढ़ती क्षमताओं को
नापता हुआ,
गति की सीमाओं को
आँकता हुआ.......... और
हर वख्त
कुछ चाहता हुआ
एक तरीका   ढूँढ लेता है
जीने का.........


22 comments:

  1. sabke apne apne tareeke
    rone ke, hasne ke
    jeene ke........:)

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  2. घूमता रहता है
    पहिये की तरह ,
    वृत्ताकार गोलाई पर ,
    घड़ी की सूईयों को
    ताकता हुआ ,
    घटती -बढ़ती क्षमताओं को
    नापता हुआ,
    गति की सीमाओं को
    आँकता हुआ.......... और
    हर वख्त
    कुछ चाहता हुआ
    एक तरीका ढूँढ लेता है
    जीने का.........

    सत्य को उद्घाटित करती प्रवाह मयी रचना

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  3. घड़ी की सूईयों को
    ताकता हुआ ,
    घटती -बढ़ती क्षमताओं को
    नापता हुआ,
    गति की सीमाओं को
    आँकता हुआ.......... और
    हर वख्त
    कुछ चाहता हुआ
    एक तरीका ढूँढ लेता है
    जीने का.........,,,,,,,,,,,,,,,,,प्रभावी पंक्तियाँ

    बेहतरीन प्रस्तुति,,,

    RECENT POST समय ठहर उस क्षण,है जाता


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  4. तरीका न भी हो तो जी ही लेता है उसी तरीके में ...

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  5. क्या किया जाए...जीना तो है ही....
    चाहे जैसे...

    अनु

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  6. क्या करें हर हाल में जीना तो पड़ता ही है. जो जीना है जिंदगी तो बहाने भी ढूंढने होंगे. सुन्दर रचना है

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  7. जीने के लिए कुछ तो करना ही है न..

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  8. वृत्ताकार गोलाई पर ,
    घड़ी की सूईयों को
    ताकता हुआ ,
    घटती -बढ़ती क्षमताओं को
    नापता हुआ,
    गति की सीमाओं को
    आँकता हुआ.......... और
    हर वख्त
    कुछ चाहता हुआ
    एक तरीका ढूँढ लेता है
    जीने का.........

    shankar mahadewan ke geet aisa lagata jaise barakha ka badal ........ki yaad aa gai . एक प्रवाह एक गति लिए रचना जीवन की बारीकी लिए .

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  9. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल २५/९/१२ मंगलवार को चर्चाकारा राजेश कुमारी के द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका वहां स्वागत है

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  10. यह कविता ही है ना???????? मुझे लगा कि कोई पहाड़ी झरना फूट पड़ा है और भागता जा रहा है!! कमाल का प्रवाह!! शानदार रचना!!

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  11. जीने का तरीक़ा जो अपने हिसाब से ढूंढ़ लेता है, वह ही सफल होता है जीवन की जंग में।

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  12. sahi baat..jina isi ka naam hae

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  13. एकदम सही बात है। अच्‍छे विचार।

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  14. जीवन का सा प्रवाह है इस कविता में..

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  15. वाह ! सुन्दर रचना'

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  16. बिल्‍कुल सही कहा आपने ... सार्थकता लिए सशक्‍त लेखन ...आभार

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  17. रास्ते तो अलग ही होंगे, मकसद केवल एक ही हो सकता है,सम्पूर्णता.
    भावों को बखूबी समेटा है.

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  18. नापता हुआ,
    गति की सीमाओं को
    आँकता हुआ.......... और
    हर वख्त
    कुछ चाहता हुआ
    एक तरीका ढूँढ लेता है
    जीने का.........बिल्‍कुल सही कहा आपने

    Recent Post…..नकाब
    पर आपका स्वगत है

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  19. हर कोई ढूढ ही लेता है तरीका जीने का अपने लिये । सुंदर प्रस्तुति ।

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