Saturday, September 29, 2012

देखी होगी तुमने.......

देखी  होगी 
तुमने........
मेरी सोती-जागती 
कल्पनाओं से,
जन्म लेती हुई
कविताओं को,प्रसव वेदना से 
मुक्त होते हुये,
सुनी होगी........ 
उनकी पहली किलकारी,
मेरी डायरी के 
पन्नों पर 
और 
महसूस किया होगा......
सृजन का सुख 
मेरे मन के 
कोने-कोने में.......

23 comments:

  1. महसूस किया होगा......
    सृजन का सुख
    मेरे मन के
    कोने-कोने में.......

    कविता के जन्म का सुन्दर सटीक मन को जचनेवाली अद्भुत व्याख्या

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  2. कविता का जन्म बहुत अच्छा विवरण |अच्छी प्रस्तुति

    आशा

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  3. सटीक चित्रण किया है मनोभावो का

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  4. महसूस किया होगा......
    सृजन का सुख
    मेरे मन के
    कोने-कोने में.......

    मनोभावों का सुंदर सटीक चित्रण,,,,

    RECENT POST : गीत,

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  5. सुंदर सटीक चित्रण

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  6. मेरी भावनाओं को स्वर देती हुई कविता.. कई बार मैंने अपने कमेन्ट में भी कहा है और अपने अभिन्न मित्र से भी कहता रहता हूँ कि जब भी मैं सारी रात की प्रसव पीड़ा झेलता हूँ, तब प्रातः एक बहुत खूबसूरत रचना जन्म लेती है..
    आज आपकी कविता ने मेरे मन की बात कह दी!! धन्यवाद आपका!!

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (01-10-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  8. कम शब्दों मे कितना सुंदर वर्णन ...!!

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  9. सृजन का सुख और कविताओं की पहली किलकारी... लाजवाब भाव...

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  10. वाह .... बहुत सुंदर, भावों की शब्दों में ढलने की यात्रा का सुख....

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  11. सृजन का सुख ...........कितना सुंदर वर्णन ...

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  12. वाह ... बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

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  13. आपका काव्य चित्रण एवं कविता में सन्निहित भाव अच्छे लगे। मेरी नई पोस्ट 'बहती गंगा' पर आपका इंतजार रहेगा। धन्यवाद।

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  14. वाह ..मृदुलाजी ..बहुत ही सुन्दर ....

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  15. वाह!! क्या बात है!

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  16. सार्थक सृजन का सुख सृजनकर्ता के साथ पढने वालों को भी अभिभूत करता है !
    बढ़िया !

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  17. सृजन का सुख .... वेदना के बाद ही मिलता है ... सुंदर एहसास

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  18. यही सृजन तो मानसिक संतोष प्रदान करता है।

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  19. बहुत सुंदर रचना
    क्या कहने

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  20. आहा ये कविता का जन्मना और इस प्रसूती का सुख ।

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  21. महसूस किया होगा......
    सृजन का सुख ... अर्थात शब्दों की किलकारी......
    खुबसूरत अभिव्‍यक्ति ।

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  22. इस सुख की कोई बराबरी नहीं ...
    आभार !

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