Tuesday, July 12, 2011

उपहार तुम्हारे लिए ........आज......

गुलमोहर की प्रातों से,
रजनीगंधा की
रातों से,
बोझिल पलकों के
सपनों से,
तन्द्रिल अलकों के
कोनों से.
भोंरों के
अलि-चुम्बन से,
दीपशिखा के
कम्पन से,
अमलतास की
साया से,
नीम तले की
छाया से.
मलयज से आती
वातों से,
चाँद दिखे
उन रातों से,
उपहार तुम्हारे लिए
आज,
मृदु मन के
उठते भावों से .

41 comments:

  1. आदरणीय मृदुला जी
    नमस्कार !
    बहुत खूबसूरत
    आपकी हर रचना की तरह यह रचना भी बेमिसाल है !
    एक और सुन्दर कविता आपकी कलम से !

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  2. मलयज से आती
    वातों से,
    चाँद दिखे
    उन रातों से,
    उपहार तुम्हारे लिए
    आज,
    मृदु मन के
    उठते भावों से .
    Pooree rachana komal bhavon se bharpoor hai!

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  3. वाह क्या बात है मृदुला जी ...बहुत खूबसूरत उपहार ..

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  4. प्रियतम का प्यार ही उपहार है,
    और उपहार ही प्यार को दर्शाता है
    ----------------------
    दहेज़ कु-प्रथा !

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  5. अनमोल, अद्भुत, अप्रतिम एवं अचिन्त्य उपहार है यह!!

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  6. अद्भुत अमूल्य उपहार..

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  7. बेहद खूबसूरत उपहार, असाधारण भी , बधाई

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  8. उपहार तुम्हारे लिए
    आज,
    मृदु मन के
    उठते भावों से .
    bahut sunder komal bhav sparsh....

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  9. क्या बात है मृदुला जी...यही तो शाश्वत उपहार है....शानदार।

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  10. अप्रतिम मृदु उपहार,ज्यों प्रकृति का सजा सितार
    अनायास छू लिया और गूँज उठी हो मधुर झंकार......

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  11. Mradula ji aapne to kamaal ki kavita likhi hai.uphaar ke saath poora hardya udel kar rakh diya.aabhar.

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  12. बेहद ख़ूबसूरत और अमूल्य उपहार! शानदार प्रस्तुती!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  13. अमूल्य उपहार.......बहुत खूबसूरत ... शानदार प्रस्तुती

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  14. बहुत अनोखा उपहार और बहुत सुंदर ढंग से दिया गया... सुंदर कविता !

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  15. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल कल 14-07- 2011 को यहाँ भी है

    नयी पुरानी हल चल में आज- दर्द जब कागज़ पर उतर आएगा -

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  16. उपहार तुम्हारे लिए
    आज,
    मृदु मन के
    उठते भावों से .

    बहुत खूब कहा है आपने इस अभिव्‍यक्ति में ।

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  17. सुंदर। अति सुंदर।

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  18. प्रकृति के अनमोल उपहार समेट लायी हैं आप इस कविता के माध्यम से ...आभार

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  19. बहुत मधुर..सुन्दर...अमूल्य उपहार !!

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  20. वाह वाह वाह...बेहद खूबसूरत...बहुत बहुत ही खूबसूरत.

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  21. nisandeh , bahut hi sundar aur anmol tohfa.

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  22. follower ka option nahi mil raha ||
    achchhi rachnaon ki badhaai ||
    hindi font bhi disturb hai ||

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  23. कोमल और अप्रतिम अहसासों से परिपूर्ण बहुत सुन्दर रचना..आभार

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  24. मलयज से आती
    वातों से,
    चाँद दिखे
    उन रातों से,
    उपहार तुम्हारे लिए
    आज,
    मृदु मन के
    उठते भावों से

    बहुत सुंदर...

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  25. waah kya baat hai pura shabdkosh hi mano sama gaya aapki rachna me. kabhi shabdkosh ka koi shabd prayog karna ho to yah ek achha zariya hai.

    bahut komal bhaavo ki rachna. aabhar.

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  26. निशब्द कर दिया है आपने,
    आभार,
    विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

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  27. बहुत सुन्दर |बधाई
    आशा

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  28. कोमल भावोँ से भरपूर अत्यन्त सुन्दर रचना. मृदुला जी आपकी कविता में सुन्दर भावोँ के साथ साथ जो अलंकारिक भाषा का प्रयोग है और लयबद्धता है वह मैथिली शरण जी की रचनाओं की याद दिलाती है.

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  29. Prakriti kee manoram jhanki...
    sundar prastuti ke liye aabhar!

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  30. मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  31. bahut sundar abhivyakti, badhai

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  32. सुंदर कविता मृदुला जी बधाई

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  33. mridula di
    jawab nahi aapka ,itna pyaara sa uphaar isse bhi badh kar kuchh ho sakta hai kya>
    har pntiyon ke har shabd dil me utar gaye.bahut hi ghudh shabdon ka saanyojan kiya hai aapne
    bahut bahut badhai
    poonam

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  34. एक अच्छी प्यारी रचना !
    शुभकामनायें आपको !

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  35. खूबसूरत अहसासों को पिरोती हुई एक सुंदर रचना. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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  36. मलयज से आती
    वातों से,
    चाँद दिखे
    उन रातों से,
    उपहार तुम्हारे लिए
    आज,
    मृदु मन के
    उठते भावों से .
    gahre jazbaat ,komal ahsaas liye khoobsurat rachna.

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