Wednesday, March 21, 2012

चलो.........

चलो, पुराने कपड़ों की तहों से
अतीत की यादों को
निकालें,
जंग लगे बक्सों के
तालों को
खोल डालें,
कोई माला ,कोई मोती ,
किसी सिक्के से
सुनें कहानी,
बर्तनों के ढेर से
सुन लें
उनकी जुबानी.
पूछें घर के
कोने-कोने से
कल की बातें......
हँस लें ,मुस्कुरा लें,
गा लें,
कि
आज की शाम
बड़ी उदास है
चलो,उसे दूर भगा लें.


64 comments:

  1. हां, पुरानी मीठी याद किसी नयी कड़वाहट को झट मिटा देती है...

    बहुत सुन्दर मृदुला जी....
    सादर

    ReplyDelete
  2. चलो भी.... जीने के लिए इनकी बड़ी ज़रूरत है

    ReplyDelete
  3. निदा साहब फरमाते हैं कि
    अपना गम लेके कहीं और न जाया जाए,
    घर में बिखरी हुई चीज़ों को संवारा जाए!
    और आपकी कविता पढकर पता चला कि क्यों ज़रूरी है उन्हें संवारना!! बहुत आनंददायक!!

    ReplyDelete
  4. जो चीज़ें बिखरी पड़ी होती हैं, कब्बाड़ के कोने में उपेक्षित पड़ी होती हैं, बड़ी बेतरतीब ढंग से इधर उधर रखकर भुला बिसरा दी गई होती हैं, उनसे बोलें-बतियाएं तो ऐसी-ऐसी गाथाएं सुनने को मिलेंगी जो करीने रखी, सजी-सजाई चीज़ों में नहीं मिलती।

    ReplyDelete
  5. सचमुच बहुत कुछ कहती हैं ये सभी चीजें, उदासी दूर करने का सुन्दर सा साधन होती हैं...

    ReplyDelete
  6. कहाँ पलायन से मिले, समाधान मुस्कान ।

    चलो सजाएं घर तनिक, बोझिल मन उकतान ।।

    ReplyDelete
  7. चलो, पुराने कपड़ों की तहों से
    अतीत की यादों को
    निकालें,
    जंग लगे बक्सों के
    तालों को
    खोल डालें,

    बहुत सुंदर भाव अभिव्यक्ति,बेहतरीन सटीक रचना,......

    my resent post


    काव्यान्जलि ...: अभिनन्दन पत्र............ ५० वीं पोस्ट.

    ReplyDelete
  8. बहुत सुंदर भाव ... यादों से अपनेपन का एहसास कराती आपकी ये पंक्तियाँ अच्छी लगी...

    ReplyDelete
  9. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....
    इंडिया दर्पण की ओर से शुभकामनाएँ।

    ReplyDelete
  10. बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति....
    इंडिया दर्पण की ओर से शुभकामनाएँ।

    ReplyDelete
  11. उदास मन को घर ही सुकून देता है ....!!
    सुंदर अभिव्यक्ति ...!!

    ReplyDelete
  12. आपकी पोस्ट कल 22/3/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    http://charchamanch.blogspot.com
    चर्चा - 826:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

    ReplyDelete
  13. Kaash! Ye bhee udaas shaam isee tarah bhaag jaye!
    Behad sundar rachana!

    ReplyDelete
  14. बहुत बढ़िया रचना मृदुला जी...
    दुबारा लिख रही हूँ...मेरा कमेन्ट जाने कहाँ गया...

    सादर.

    ReplyDelete
  15. bahut hi khoobsoorat rachana .....saadar badhai pardhan ji.

    ReplyDelete
  16. यादो के पिटारे जब भी खुलते है कई अहसाह अपने आगोश में हमें ले लेते है...जरूरी नहीं की हर बार याद उदासी ही दे जाये .

    ReplyDelete
  17. वो शाम कुछ अजीब थी
    जब यादों के खंज़र चलते है...

    ReplyDelete
  18. बहुत सुन्दर और सटीक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की है आपने!

    ReplyDelete
  19. जंग लगे बक्सों के
    तालों को
    खोल डालें,
    कोई माला ,कोई मोती ,
    किसी सिक्के से
    सुनें कहानी,
    बर्तनों के ढेर से
    सुन लें
    उनकी जुबानी.
    यादों की गठरी से उदास शाम को मनभावन बनाना ....सुन्दर शब्द सुन्दर कल्पना

    ReplyDelete
  20. सुंदर भाव अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  21. स्मृतियों से बढ़कर और कोई दोस्त नहीं ...
    बहुत प्यारी रचना

    ReplyDelete
  22. बहुत खूब ... यादों का डर खात्खाने से बड़ा सुख नहीं ... अगर यादें हसीन हों ... बहुत लाजवाब ..

    ReplyDelete
  23. उदासी में भी यादें अच्छे पलों को बिखेर देती है..अच्छी लगी..

    ReplyDelete
  24. आपको नव संवत्सर 2069 की सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएँ।

    ----------------------------
    कल 13/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  25. आपको नव संवत्सर 2069 की सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएँ।

    ----------------------------
    कल 23/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

    ReplyDelete
  26. बहुत खूबसूरत एवं नितांत मौलिक रचना मृदुला जी ! मन को अंदर तक आल्हादित कर गयी ! बहुत खूब !

    ReplyDelete
  27. उदासी को दूर करने का नायाब तरीका ...सुंदर रचना

    ReplyDelete
  28. बहुत कोमल भावों से सजी सुन्दर रचना |

    ReplyDelete
  29. अतीत में सुकून तलाशती रचना ...बहुत खूब!

    ReplyDelete
  30. पास जो चीजें पडी हैं
    वे ही खुशियों की लड़ी हैं

    ReplyDelete
  31. चलो, पुराने कपड़ों की तहों से
    अतीत की यादों को
    निकालें,
    जंग लगे बक्सों के
    तालों को
    खोल डालें,
    bahut umda bhaav behtreen prastuti.

    ReplyDelete
  32. बहुत बहुत धन्यवाद् की आप मेरे ब्लॉग पे पधारे और अपने विचारो से अवगत करवाया बस इसी तरह आते रहिये इस से मुझे उर्जा मिलती रहती है और अपनी कुछ गलतियों का बी पता चलता रहता है
    दिनेश पारीक
    मेरी नई रचना

    कुछ अनकही बाते ? , व्यंग्य: माँ की वजह से ही है आपका वजूद: एक विधवा माँ ने अपने बेटे को बहुत मुसीबतें उठाकर पाला। दोनों एक-दूसरे को बहुत प्यार करते थे। बड़ा होने पर बेटा एक लड़की को दिल दे बैठा। लाख ...

    http://vangaydinesh.blogspot.com/2012/03/blog-post_15.html?spref=bl

    ReplyDelete
  33. उदासी को दूर भगाना बहुत जरूरी है.....बहुत बढ़िया!

    ReplyDelete
  34. उदासी को दूर भगाइए
    खुशियों को बटोरने में जुट जाइये..
    सुन्दर रचना
    शुभकामनाए:-)

    ReplyDelete
  35. यादो के झरोखों में बहुत कुछ छुपा होता है

    ReplyDelete
  36. अच्छी यादें हमारी उदासी को बहुत आसानी से दूर करती है. बहुत सुन्दर रचना, बधाई.

    ReplyDelete




  37. चलो, पुराने कपड़ों की तहों से
    अतीत की यादों को
    निकालें,
    जंग लगे बक्सों के
    तालों को
    खोल डालें,
    कोई माला ,कोई मोती ,
    किसी सिक्के से
    सुनें कहानी,
    बर्तनों के ढेर से
    सुन लें
    उनकी जुबानी.
    पूछें घर के
    कोने-कोने से
    कल की बातें......
    हँस लें ,मुस्कुरा लें,
    गा लें,
    कि
    आज की शाम
    बड़ी उदास है
    चलो,उसे दूर भगा लें.


    बहुत खूबसूरत !
    मुबारकबाद !

    ReplyDelete
  38. कोमल भावो से सजी सुन्दर रचना..

    ReplyDelete
  39. बहुत ही खुबसूरत एहसास.... जीवन को भरपूर जीने की शिक्षा देती सुंदर कविता.
    ताकत

    ReplyDelete
  40. बहुत खूब! पुरानी यादें भी कभी सहारा बन् जाती हैं...

    ReplyDelete
  41. ऐसी कोशिशें जिंदगी को जिंदादिल से जीने के लिए जरूरी हैं !

    ReplyDelete
  42. बहुत सुन्दर.

    ReplyDelete
  43. हँस लें ,मुस्कुरा लें,
    गा लें,
    कि
    आज की शाम
    बड़ी उदास है
    चलो,उसे दूर भगा लें.
    बहुत ही बढि़या।

    ReplyDelete
  44. यादें मन को कितना सुकून देती हैं।
    अच्छे शब्द, सुंदर भाव !

    ReplyDelete
  45. बहुत बढ़िया,बेहतरीन करारी अच्छी प्रस्तुति,..
    नवरात्र के ४दिन की आपको बहुत बहुत सुभकामनाये माँ आपके सपनो को साकार करे
    आप ने अपना कीमती वकत निकल के मेरे ब्लॉग पे आये इस के लिए तहे दिल से मैं आपका शुकर गुजर हु आपका बहुत बहुत धन्यवाद्
    मेरी एक नई मेरा बचपन
    कुछ अनकही बाते ? , व्यंग्य: मेरा बचपन:
    http://vangaydinesh.blogspot.in/2012/03/blog-post_23.html
    दिनेश पारीक

    ReplyDelete
  46. अतीत में प्रवेश करें
    और उसे नया बना लें

    ReplyDelete
    Replies
    1. चलो.........
      चलो, पुराने कपड़ों की तहों से
      अतीत की यादों को
      निकालें,
      जंग लगे बक्सों के
      तालों को
      खोल डालें,
      पुराने सामान को खंगालते हुए ऐसे ही मन अतीत की ओर पुराने सामान को खंगालते हुए ऐसे ही मन अतीत की ओर लौटता है ,वक्त रुक जाता है,वर्तमान हवा हो जाता है .

      Delete
  47. चलो, पुराने कपड़ों की तहों से
    अतीत की यादों को
    निकालें,
    जंग लगे बक्सों के
    तालों को
    खोल डालें,

    वाह सुंदर सोच. सुंदर विचार.

    ReplyDelete
  48. bahut bahut hi umda post---
    poonam

    ReplyDelete
  49. Chalo fir aisa hi kuchh karein.. :)
    ki mann ki girahein kholne k lie koi nahi milta, saaman se hi dil behla lein...

    ReplyDelete
  50. आज की शाम
    बड़ी उदास है
    चलो,उसे दूर भगा लें.


    जीवन का आनंद हैं ऐसे विचार ...यह फूलते रहें यही कामना है ...

    ReplyDelete
  51. हँस लें ,मुस्कुरा लें,
    गा लें,
    कि
    आज की शाम
    बड़ी उदास है
    चलो,उसे दूर भगा लें.
    अच्छी कविता..... एक सार्थक और आशावाद में ढली कविता! प्रस्तुति उम्दा हैं

    ReplyDelete
  52. वाह ! ! ! ! ! बहुत खूब सुंदर रचना,बेहतरीन भाव प्रस्तुति,....

    MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: तुम्हारा चेहरा,

    ReplyDelete
  53. हँस लें ,मुस्कुरा लें,
    गा लें,
    कि
    आज की शाम
    बड़ी उदास है
    चलो,उसे दूर भगा लें.
    aapaki is sundar rachana men mujhe apana hi gharonda nazar aaya.aisa laga hum baithe hain apanon ke hi biich.

    ReplyDelete
  54. हँस लें ,मुस्कुरा लें,
    गा लें,
    कि
    आज की शाम
    बड़ी उदास है
    चलो,उसे दूर भगा लें.
    lajavab kavita
    rachana

    ReplyDelete
  55. सुन्दर प्रस्तुति। मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।
    http://vangaydinesh.blogspot.in/2012/02/blog-post_25.html
    http://dineshpareek19.blogspot.in/2012/03/blog-post_12.html

    ReplyDelete
  56. उदासी दूर भागने का यह तरीका अच्छा है

    ReplyDelete
  57. यादों में जादू है कैसी भी उदासी भाग जाती है ।
    बहुत ही सुंदर रचना ।

    ReplyDelete
  58. बहुत अच्छा लिखे हो, मम्मी

    ReplyDelete