Wednesday, April 4, 2012

यह आज की नारी है......

नए-नए आयाम
बनाती है,
शिखर पर झंडे
लगाती है,
यह आज की नारी है......
हर जगह
पहुँच जाती है.
सहिष्णुता के
आवरण में
ज्ञान-विज्ञान से,
अन्याय की त्रासदी को
ललकारकर,
आत्मबल के आभूषण से
सुसज्जित,
ईंट-पत्थरों के बीच
कंक्रीट सी.....
कोमलांगिनी की सशक्त
उँगलियों ने,
पकड़ ली है
समय की रफ़्तार,
तकनिकी ज्ञान के
माध्यम से,
खोलती  हुई हर द्वार.
सूछ्म कन्धों पर
दायित्व का
जहाज़  लिए,
अडिग पैरों के
संतुलन
और
असीमित भुजाओं के
अनुशासन से,
श्रम का
योगदान कर
परिवार को सींचती,
स्वाभिमान के
गौरव को
सहेजती,संभालती,
यह आज की नारी है.......
इसमें
एक अलग ही
चमक है,
विकास के
हर आँगन में,
अब
चूड़ियों की खनक है.

34 comments:

  1. बहुत सुन्दर मृदुला जी............
    सच है आज की नारी सशक्त है...सफल है.....सबला है.....
    मगर कहीं ना कहीं आज भी अपने अस्तित्व को तलाशती है....

    सादर.

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  2. नारी में ईश्वर ने ही अनेक शक्तियाँ भर दी है...आज की नारी उन शक्तियों का बखूबी प्रयोग कर के...समाज को विकास की और ले जा रही है!...सुन्दर रचना..आभार!

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  3. विकास के
    हर आँगन में,
    अब
    चूड़ियों की खनक है.
    बिल्कुल सही कहा मृदुला जी……सुन्दर अभिव्यक्ति

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  4. अपने मनोभावों को बहुत सुन्दर शब्द दिये हैं बधाई।

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  5. अच्‍छे शब्‍द संयोजन के साथ सशक्‍त अभिव्‍यक्ति।

    संजय भास्कर
    आदत....मुस्कुराने की
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  6. नारी तो अपने आप में एक पूरा ग्रन्थ है .....बहुत सुन्दर

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  7. नारी की महिमा अपरंपार है।

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  8. बिलकुल सच कहा है...बहुत सुन्दर रचना...

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  9. सचमुच आज की नारी का सही चित्रण किया है आपने !
    आभार!

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  10. बढ़िया रचना,बहुत सुंदर भाव प्रस्तुति,बेहतरीन पोस्ट मृदुला जी ,....

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    MY RECENT POST...फुहार....: दो क्षणिकाऐ,...

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  11. नारी पूज्य ही है और शक्ति भी है .. आज नारी आत्मनिर्भर भी है ... अच्छी रचना ...

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  12. और खनक की बढ़ती धमक भी है ..

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  13. पर आज की नारी भी मुक्त नहीं , मुक्त होने की कोशिशों में है .... हर ओहदे पे , चूड़ियों की खनक भी .... पर आलोचना जारी है

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  14. Vikas ke har aagan me ab chudiyon ki khanak hai ... behtareen rachna ke liye dhero badhai ....

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  15. एक लंबे अंतराल के बाद आपके पोस्ट पर आना हुआ। कविता बहुत अच्छी लगी । मेरे पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

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  16. नारी शक्ति को सलाम!!इस बार अंतराल कुछ विशेष लंबा रहा!!

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  17. बहुत सुंदर और सटीक प्रस्तुति ...

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  18. विकास के
    हर आँगन में,
    अब
    चूड़ियों की खनक है. bahut sunder!!! :-)

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  19. नारी की सशक्त प्रस्तुती......

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  20. विकास के
    हर आँगन में,
    अब
    चूड़ियों की खनक है.
    विकास का मार्ग तो सदा सर्वदा से नारियों की प्रतिभाओं से भरा पड़ा है ...

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  21. बहुत गौरवशाली रचना|

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  22. आज की नारी की हर सफलता और भूमिका का सुन्दर चित्रण. परन्तु ये आज का ही सच है कि ये सभी सफलताएं महज़ अपवाद है. आम नारी आज भी त्रासद जीवन जी रही है. आत्मविश्वास जगाती रचना के लिए बधाई मृदुला जी.

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  23. यह आज की नारी है.......
    इसमें
    एक अलग ही
    चमक है,
    विकास के
    हर आँगन में,
    अब
    चूड़ियों की खनक है.

    वाह, ये आपकी सच बयानी । सुंदर कविता ।

    पर जहाज कंधों पर (?) जमा नही ।

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  24. बहुत अच्छी रचना, नारी की बदलती भूमिकाआओं का स्वागत करती है आपकी रचना। बधाई!

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  25. विकास के
    हर आँगन में,
    अब
    चूड़ियों की खनक है।

    वास्तविकता को आपने सुंदर शब्दों में प्रस्तुत किया है।

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  26. नारी की गरिमा को सशक्त रूप से व्क्त किया है आपने ।प्रशंसनीय

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  27. विकास के
    हर आँगन में,
    अब
    चूड़ियों की खनक है।
    वाह ...बहुत ही अनुपम भाव संयोजन ।

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  28. bahut khoobsurat :)

    par aaj bhi kahin na kahin....yeh kai tayaag kar dusron ki khushi ban jaati hai...

    kya koi inki khushi nahi ban sakta ?

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  29. इसमें
    एक अलग ही
    चमक है,
    विकास के
    हर आँगन में,
    अब
    चूड़ियों की खनक है.
    bahut khoob
    rachana

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  30. विकास के
    हर आँगन में,
    अब
    चूड़ियों की खनक है।...बहुत ही सुन्दर कृति.एक.सशक्त प्रस्तुति...

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