Thursday, April 19, 2012

कतरा-ए-शबनम पे छा जाये जुनूँ.......

ये कैसी है मुहब्बत,है नहीं 
जिसका     गुमां   मुझको, 
इबादत    से   भी     पहले 
वो,   इबादत जान लेते  हैं.
     यहाँ ख़्वाबों की  लज्ज़त में 
     उन्हीं  का अक्स है शामिल,
     वहाँ  दूरी  के   दामन से  वो
     ख़ुद    को    बाँध    लेते   हैं.
मेरी       बेमानियाँ        बातें
मेरी   पेशानियों   के  बल,वो 
मेरी   तल्खियों  तक  के  भी 
आकर    हाल     लेते        हैं.
        हुई   मुद्दत कि  निस्बत है 
        निगहबानी     उन्हीं     की,
        हुनर उनमें   इशारों को भी 
        इतना      मान     देते    हैं.

                         आबशारों    की    सदा- ए- गश्त   में
                   कतरा-ए-शबनम पे  छा  जाये   जुनूँ
                   इश्के-सादिक वो मुझे नायाब देते   हैं 
                   मैं चल नहीं पाता कि वो थाम लेते हैं.   
                                   
                   

       
      

26 comments:

  1. वाह मृदुला जी............

    मेरी बेमानियाँ बातें
    मेरी पेशानियों के बल,वो
    मेरी तल्खियों तक के भी
    आकर हाल लेते हैं.

    बहुत खूब
    सुंदर गज़ल .....

    अनु

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  2. वाह .... बहुत खूबसूरत
    चल भी नहीं पाता की वो थाम लेते हैं ... गजब की अभिव्यक्ति

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  3. इश्के-सादिक वो मुझे नायाब देते हैं
    मैं चल नहीं पाता कि वो थाम लेते हैं.
    बहुत सुंदर जज़्बात .

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  4. गज़ब अभिव्यक्ति...

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  5. आबशारों की सदा- ए- गश्त में
    कतरा-ए-शबनम पे छा जाये जुनूँ
    इश्के-सादिक वो मुझे नायाब देते हैं
    मैं चल नहीं पाता कि वो थाम लेते हैं.
    वाह !!!! बहुत बढ़िया गजब की प्रस्तुति,सुंदर अभिव्यक्ति,

    MY RECENT POST काव्यान्जलि ...: कवि,...

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  6. कमाल के शेर हैं सब ... बहुत नायाब अंदाज़ आपका हमेशा दिल में उतरता है ...

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  7. सुन्दर प्रस्तुति |
    आभार ||

    शुभकामनाये ||

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  8. अनूठे शब्द और अद्भुत भाव से सजी इस रचना के लिए बधाई स्वीकारें...

    नीरज

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  9. आबशारों की सदा- ए- गश्त में
    कतरा-ए-शबनम पे छा जाये जुनूँ
    इश्के-सादिक वो मुझे नायाब देते हैं
    मैं चल नहीं पाता कि वो थाम लेते हैं. waah

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    1. ख़ूबसूरत रचना, सुन्दर भावाभिव्यक्ति .

      कृपया मेरे ब्लॉग"meri kavitayen" की १५० वीं पोस्ट पर पधारें और अब तक मेरी काव्य यात्रा पर अपनी राय दें, आभारी होऊंगा .

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  10. वाह ...बहुत खूब।

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  11. इश्के-सादिक वो मुझे नायाब देते हैं
    मैं चल नहीं पाता कि वो थाम लेते हैं.
    शानदार, लाजवाब.. बहुत खूबसूरत जज्बात....

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  12. मैं चल नहीं पाता कि वो थाम लेते हैं.
    सुंदर अभिव्यक्ति,

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  13. मेरी बेमानियाँ बातें
    मेरी पेशानियों के बल,वो
    मेरी तल्खियों तक के भी
    आकर हाल लेते हैं.

    बहुत सुंदर गजल..सभी शेर काबिलेतारीफ हैं...

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  14. बहुत सुन्दर गज़ल ....

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  15. बहुत अच्छी प्रस्तुति!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  16. बहुत सुंदर गजल

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  17. यहाँ ख़्वाबों की लज्ज़त में
    उन्हीं का अक्स है शामिल,
    वहाँ दूरी के दामन से वो
    ख़ुद को बाँध लेते हैं.

    बहुत सुन्दर रचना ... वाकई सभी शेर लाजवाब हैं...

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  18. हुई मुद्दत कि निस्बत है
    निगहबानी उन्हीं की,
    हुनर उनमें इशारों को भी
    इतना मान देते हैं.

    वाह.....खूबसूरत...!

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  19. वाकई ! ख़ूबसूरत शेर ..

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  20. यहाँ ख़्वाबों की लज्ज़त में
    उन्हीं का अक्स है शामिल,
    वहाँ दूरी के दामन से वो
    ख़ुद को बाँध लेते हैं.
    ..बहुत लाजवाब गज़ल ... ...

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  21. ये कैसी है मुहब्बत,है नहीं
    जिसका गुमां मुझको,
    इबादत से भी पहले
    वो, इबादत जान लेते हैं.

    ....लाज़वाब प्रस्तुति...

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  22. Bahut hi Sundar prastuti. Mere post par aapka intazar rahega. Dhanyavad.

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  23. बहुत ही खूबसूरत

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  24. इश्के-सादिक वो मुझे नायाब देते हैं
    मैं चल नहीं पाता कि वो थाम लेते हैं.

    वाह! बहुत खूबसूरत... Enjoyed reading it :-)

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