Sunday, March 6, 2011

कि न फ़िक्र हो तुमको मेरी.......

कि न फ़िक्र हो
तुमको मेरी,
न मुझे
तेरा ख्याल हो,
या खुदा
वो दिन न हो,
जिसमें
ये अपना हाल हो.
सूरज तुम्हारा
हो अलग
और
चाँद
अलग हो मेरा,
रंग हमारे
अपने -अपने,
ख्वाब
अलग हो सारा,
तुम कहीं रहो
मैं कहीं
और
दिन ढल जाये,
कोई सोये
कोई जागे,
रातें
चल जाये,
हो आसमान
अपना-अपना,
अपने-अपने
हों तारे,
इन्द्रधनुष के
आर-पार
बँट जाएँ
सपने सारे.
सावन-भादो की
बूंदे हों
अपनी-अपनी,
अपना वसंत
और धूप-छांव
अपनी ले-लेकर,
अलग- अलग
रह जाएँ
कि न चाह हो
कोई तुम्हें,
न मेरा कोई
सवाल हो,
या खुदा
वो दिन न हो,
जिसमें
ये अपना हाल हो.

43 comments:

  1. वाह क्या खूब चाह है…………सच ऐसा कभी ना हो हर दिल की यही आस होती है………अति सुन्दर अभिव्यक्ति।

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  2. कि न चाह हो
    कोई तुम्हें,
    न मेरा कोई
    सवाल हो,
    या खुदा
    वो दिन न हो,
    जिसमें
    ये अपना हाल हो.
    ईश्वर ऐसा ही करे .... बेहद सुंदर रचना

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  3. बहुत खूबसूरत इच्छा ... कभी ऐसा न हो ....सुन्दर अभिव्यक्ति

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  4. या खुदा
    वो दिन न हो,
    जिसमें
    ये अपना हाल हो.
    सूरज तुम्हारा
    हो अलग
    और
    चाँद
    अलग हो मेरा,
    रंग हमारे
    अपने -अपने,
    ख्वाब
    अलग हो सारा,
    तुम कहीं रहो
    मैं कहीं
    bilkul nahi... saath hamesha bana rahe , rang ek se hon

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  5. कि न चाह हो
    कोई तुम्हें,
    न मेरा कोई
    सवाल हो,
    या खुदा
    वो दिन न हो,
    जिसमें
    ये अपना हाल हो.

    वाह ...ये ख्‍याल भी कहां कहां चले जाते हैं .बहुत ही सुन्‍दर ।

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  6. बंदे का बस चले तो वह ऐसा ही कर ले इसलिए खुदा ने एक ही सूरज बनाया एक ही चाँद और एक ही हवा में हम सबको लेनी है साँस !

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  7. wah bouth he shabad hai aapke iss post mein.... thx

    Visit my blog plz friends...
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  8. कोमल भावों की सुन्दरतम अभिव्यक्ति....

    ईश्वर करे कभी ऐसा न हो

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  9. या खुदा
    वो दिन न हो,
    जिसमें
    ये अपना हाल हो...

    बहुत खूब ... सच में ऐसा नहीं होना चाहिए ... दो दिल प्यार करें उनका सब कुछ साथ साथ होना चाहिए ....

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  10. मृदुला जी,

    इतना ही कहूँगा.....आमीन.....

    ये लाइने बहुत पसंद आयीं -

    कि न चाह हो
    कोई तुम्हें,
    न मेरा कोई
    सवाल हो,
    या खुदा
    वो दिन न हो,
    जिसमें
    ये अपना हाल हो.

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  11. bahut khubsurat bhav..........

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  12. सच कहा आपने , वो दिन कभी न आये जब अपनों से अलग होकर जीना पड़े। एक आसमान के नीचे एक चांदनी में जो सुख है , वो कहीं नहीं...

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  13. बेहद रूमानी कविता....

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  14. या खुदा
    वो दिन न हो,
    जिसमें
    ये अपना हाल हो.
    ईश्वर करे कभी ऐसा न हो ,सुन्दरतम अभिव्यक्ति....

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  15. कि न चाह हो
    कोई तुम्हें,
    न मेरा कोई
    सवाल हो,
    या खुदा
    वो दिन न हो,
    जिसमें
    ये अपना हाल हो.
    वैसे यह शेर लगता है मगर आपने लघु पंक्तियों में लिख कर कुछ दुविधा में डाल दिया था | जबरदस्त जोरदार अच्छा लगा , शुभकामनायें

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  16. इच्छाएं वाजिब हैं.

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  17. कि न चाह हो
    कोई तुम्हें,
    न मेरा कोई
    सवाल हो,
    या खुदा
    वो दिन न हो,
    जिसमें
    ये अपना हाल हो.

    बहुत खूब! बहुत भावपूर्ण सुन्दर प्रस्तुति..

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  18. खुबसुरत अभिव्यक्ति। खुदा करे ऐसा हाल कभी किसी का न हो।

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  19. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 08-03 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    http://charchamanch.uchcharan.com/

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  20. हम भी दुआ करेंगे कि यह दिन दुश्मनों को भी न दिखाए!!

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  21. "कि न चाह हो
    कोई तुम्हें,
    न मेरा कोई
    सवाल हो,
    या खुदा
    वो दिन न हो,
    जिसमें
    ये अपना हाल हो."

    बहुत खूबसूरती से हर पंक्ति गढ़ी है आपने...
    सुन्दर एहसास...
    सुन्दर भाव......!!

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  22. बहुत खूबसूरत रचना, धन्यवाद

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  23. बहुत खूबसूरत रचना ! प्यार की पराकाष्ठा का बहुत सुन्दर चित्रण किया है ! एकाकी होने पर सारी कायनात भी कैसी बेमानी सी लगती है इस बात का अहसास बखूबी करा दिया है आपने ! बहुत सुन्दर रचना !

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  24. आज मंगलवार 8 मार्च 2011 के
    महत्वपूर्ण दिन अन्त रार्ष्ट्रीय महिला दिवस के मोके पर देश व दुनिया की समस्त महिला ब्लोगर्स को सुगना फाऊंडेशन जोधपुर की ओर हार्दिक शुभकामनाएँ..

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  25. लयबद्ध सुंदर आधुनिक कविता प्रस्तुत करने के लिए बधाई स्वीकार करें मृदुला जी

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  26. bahut hi marmsparshi rachnaa.....

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  27. महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

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  28. या खुदा
    वो दिन न हो,
    जिसमें
    ये अपना हाल हो.
    bahut sunder rachna .
    bahut sunder bhav

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  29. वाह वाह मृदुला जी बहुत खूबसूरत रचना इतनी सादगी से खितनी बी बात कह डाली । आमीन ।

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  30. कृपया कितनी बडी पढें ।

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  31. कविता अच्छी लगी। खुदा को याद न किया जाय और दिन गुजर जाय,ऐसा कभी न हो। सुन्दर है। आभार।

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  32. हो आसमान अपना-अपना,
    अपने-अपने हों तारे,
    इन्द्रधनुष के आर-पार बँट जाएँ
    सपने सारे.

    ... सुन्दर शब्द रचना सुन्दर संसार के लिए चाह.

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  33. सूरज तुम्हारा
    हो अलग
    और
    चाँद
    अलग हो मेरा,
    रंग हमारे
    अपने -अपने,
    ख्वाब
    अलग हो सारा,
    तुम कहीं रहो
    मैं कहीं
    khone ka dar bura hota hai ,sundar rachna ,mahila divas ki badhai .

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  34. कविता अच्छी लगी। धन्यवाद|

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  35. कि न चाह हो
    कोई तुम्हें,
    न मेरा कोई
    सवाल हो,
    या खुदा
    वो दिन न हो,
    जिसमें
    ये अपना हाल हो. mohak..

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  36. मृदुला जी आपकी दोनों कविताएं स्तरीय हैं । गहन अनुभूति से भरी । एकान्त ...कविता एक सच को उजागर करती है कि पूर्ण अभिव्यक्ति के बाद हम मुक्त हो जाते हैं ।

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  37. मैं पिछले कुछ महीनों से ज़रूरी काम में व्यस्त थी इसलिए लिखने का वक़्त नहीं मिला और आपके ब्लॉग पर नहीं आ सकी!
    सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ उम्दा रचना लिखा है आपने! बेहतरीन प्रस्तुती!

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  38. बहुत खूब! बहुत भावपूर्ण सुन्दर प्रस्तुति..

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