Saturday, January 1, 2011

ईंट -पत्थरों से......

ईंट -पत्थरों से  
जोड़-जोड़कर,
इकठ्ठा किया हुआ 
वात्सल्य ,
खेत-खलिहानों की
लहलहाहट पर फैलाया हुआ
स्वाभिमान,
कल-कारखाने,व्यवसाय में
समाहित
गगनचुम्बी सपने
और
मजबूती से बंधी हुई,
सम्मिलित,
सम्मानित गरिमा का
संग्रह,
रिश्तों में घुलते हुए,
'मैं' की
प्रचुरता से
अपमानित होकर ,
स्नेह ,ममता ,त्याग ,
विश्वास
और
आशीर्वाद की जायदाद को ,
विस्मित
कर रही हैं .
खुद को सभ्य-
सुसंस्कृत कहनेवाले
लोगों ने ,
आनेवाली पीढ़ियों को,
एक नए
पर्यायवाची का उपहार
दे दिया है,
'एन्सेसट्रल-प्रोपर्टी' को
'एक भयानक शब्द 'का
दर्जा देकर
स्थापित कर दिया है .

35 comments:

  1. खुद को सभ्य-
    सुसंस्कृत कहनेवाले
    लोगों ने ,
    आनेवाली पीढ़ियों को,
    एक नए
    पर्यायवाची का उपहार
    दे दिया है,



    बहुत सुंदर रचना -
    मन को छू गयी

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  2. बहुत ही सुंदर रचना.......

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  3. Naya saal bahut,bahut mubarak ho!

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  4. अच्छी तथा विचारणीय कविता.

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  5. नए साल की पहली पोस्ट...अच्छी लगी. नव वर्ष पर आपको ढेर सारी बधाइयाँ.
    _____________
    'पाखी की दुनिया' में नए साल का पहला दिन...

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  6. सुन्दर रचना .. सुन्दर भाव... आपको और आपके परिवार इष्ट मित्रों के लिए नया साल शुभ हो .. मंगल कामनाएं ..

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  7. मृदुला जी!
    आपकी कविता पर प्रतिक्रिया के लिये शब्द ढूंढने चला तो जनाब मुनव्वर राना का यह शेर ज़ुबानपर आ गया:
    किसी को घरमिला हिस्से में, और कोई दुकाँ आई,
    मैं घर में सबसे छोटा था, मेरे हिस्से में माँ आई!

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  8. मृदुला जी,

    अत्यंत ही सुन्दर भाव से ओत प्रोत रचना!

    साधुवाद

    --------------------------
    ब्लॉग पर आपका स्वागत रहेगा
    -------------------------

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  9. अत्यंत ही सुन्दर भाव
    नव वर्ष पर आपको ढेर सारी बधाइयाँ.

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  10. सुन्दर ! नव वर्ष मुबारक !

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  11. बहुत सुन्दर! दिल को छू जाने वाली रचना .

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  12. दिल की गहराईयों को छूने वाली एक खूबसूरत, संवेदनशील और मर्मस्पर्शी प्रस्तुति. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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  13. कविता के कथ्य में नयापन है,
    यह नयापन अच्छा लगा।
    चिंता की बात है कि हमारे संस्कार तेजी से विघटित हो रहे हैं।

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  14. खुद को सभ्य-
    सुसंस्कृत कहनेवाले
    लोगों ने ,
    आनेवाली पीढ़ियों को,
    एक नए
    पर्यायवाची का उपहार
    दे दिया है,
    'एन्सेसट्रल-प्रोपर्टी' को
    'एक भयानक शब्द 'का
    दर्जा देकर
    स्थापित कर दिया है .



    सार्थक रचना...
    नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं...

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  15. अति सुंदर रचना, धन्यवाद
    आप ओर आप के परिवार को नव वर्ष की शुभकामनाएं।

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  16. एन्सेसट्रल-प्रोपर्टी' को
    'एक भयानक शब्द 'का
    दर्जा देकर
    स्थापित कर दिया है .
    सच कहा है आपने ..शुक्रिया

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  17. नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं.

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  18. आशीर्वाद की जायदाद जुटाना मुश्किल है. अच्छी प्रेरणा.
    सलिल जी के शब्दों से सहमत हूँ.
    नए साल की शुभकामना.

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  19. वर्तमान समाज पर कटाक्ष करती सुन्दर रचना !
    नववर्ष की शुभकामनायें !

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  20. आदरणीय मृदुला जी,
    नमस्कार !
    ..........रचनाएं अच्छी लगीं.
    भावों की खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
    नव-वर्ष की शुभकामनाएँ आपको और आपके परिवार को भी गहन

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  21. बहुत ही सुन्‍दर भावमय करते शब्‍द ।

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  22. वाह....मृदुला जी......आपकी रचनाएँ बहुत गहरे अर्थ लिए होती हैं.......बहुत ही सुन्दर लगी ये रचना|

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  23. बहुत ही संवेदनशील रचना है ... सचाई है इसमें ... ..
    आपको और आपके पूरे परिवार को नव वर्ष मंगलमय हो ...

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  24. मिर्दुला जी भावात्मक कृति बहुत ही अच्छी लगी,
    बहुत बहुत शुभकामना के साथ नव वर्ष मंगलमय हो

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  25. Mridula ji , bahut hi gahre bhav hai .....sunder prastuti

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  26. खुद को सभ्य-
    सुसंस्कृत कहनेवाले
    लोगों ने ,
    आनेवाली पीढ़ियों को,
    एक नए
    पर्यायवाची का उपहार
    दे दिया है,
    bahut umda rachna likhi hai aapne ,nav barsh mangal maya ho aap sabhi ka .

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  27. नववर्ष की मंगल कामना!

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  28. जिस गहराई तक आपकी अभिव्यक्ति उतर जाती है . मै तो बापुरा बने किनारे से अचंभित होता रहता हूँ .

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  29. सभ्य और सुसंस्कृत कहलाने वाले लोग आनेवाली पीढ़ी को ''एन्सेसट्रल प्रोपर्टी" के रूप में ऐसी ही विरासत दे जा रहे हैं...... खूबसूरत शब्दों में व्यक्त किये है विचार आपने...

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  30. behad sundar kavita aur navarsh dono ke liye aapko badhai aur shubhkamnayen

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  31. सुंदर रचना.

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  32. bahut sunder rachna .
    nav varsh ki anek shubh kamnaye......

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