Tuesday, November 1, 2011

एक दृश्य.......यह भी......

'सन्डे'की सुबह
'पॉश'- 'कालोनी' के
'फ्लैट' की 
'बाल्कनी' में ,
जो एक लम्बा सन्नाटा 
बिछ जाता है........
शनिवार की रात का 
'साइड -इफेक्ट'
साफ़ नज़र आता है.
मंथर-गति से 
सुगबुगाहट सी होती है,
पर्दे सरकते हैं ,
कुण्डियाँ खड़खड़ातीं  हैं,
दरवाज़े खुलते हैं 
और 
हाफ़-पैंट धारी
'डैडी',
'पेपर' लिए हुये
'केन' की कुर्सी पर
फैल जाते हैं.
'रेलिंग' के सहारे 
आकर,
खड़ी हो जाती है
एक बच्ची,प्यारी सी,
'बारबी' 'डॉल' का हाथ
मुठ्ठी में
पकड़े हुए.......
उसका भाई
ऐसा मेरा अनुमान है.....
'स्केटिंग' का जूता पहने,
इधर से उधर  
फिसलता है,झिड़कियाँ   
खाता है
फिर  फिसलता  है,
यही क्रम   
चलता रहता है.
'ट्रौली' पर चढ़कर  
चाय-दूध, बिस्किट,
फल-वल,
जाने क्या-क्या,
एक 'आया'
लगा  जाती है.....
और तब  
बड़े-बड़े  फूलोंवाली  
रेशमी  'नाईटी' पहने 
घर  की गृहणी  
बाहर आती  है.
बैठकर  इत्मिनान  से,
आस-पास  का मुआएना  कर  
संतुष्ट  भाव  से,
बिस्किट के डब्बे  को  
खोलते  हुए,
बच्चों  को  आवाज़  
लगाते हुए,
डालती  है 'कपों'  में
'स्टाईल' से
चाय-दूध
नफ़ासत की हद  तक,
शक्कड़  मिलाती  है 
और........इधर 
मेरी  जिज्ञासा  
बढ़ती चली  जाती है.......
वहाँ सब  पीने  लगते  हैं 
चाय - वाए,
खाने  लगते हैं 
बिस्कुट-विस्कुट  
फल-वल, 
जाने क्या-क्या,
सोचती  हूँ ........
ये  'लाम- काफ़' की चाय  
कैसी  होती होगी?
और........इसी  उधेड़-बुन  में 
उस  'साइड-इफेक्ट'  का 
'आफ्टर-इफेक्ट'  तो  देखिये  
मेरे  सामने  रखी 
गर्म  चाय,
बिना  पीये  
खामखा
ठंढी  हो जाती है.......... 



  
  

42 comments:

  1. आफ्टर इफेक्ट वाकयी दुखदायी है ..बताइए भला आपकी चाय ठंडी हो गयी इस दृश्य को देखते हुए ...

    सच्चाई को दिखाती अच्छी रचना

    ReplyDelete
  2. jise phir garm karna hoga ... waise drishy bahut bhayaa .

    ReplyDelete
  3. इस दृश्य के पीछे आधुनिक जीवन का अर्थशाश्त्र छुपा है...

    ReplyDelete
  4. गर्म चाय,
    बिना पीये
    खामखा
    ठंढी हो जाती है..........

    बहुत बढि़या भाव संयोजन ।

    ReplyDelete
  5. वास्तविकता का बहुत ही सजीव चित्र प्रस्तुत किया है आपने।

    सादर

    ReplyDelete
  6. bahut achcha chitra sa aakkhon ke samne sajeev ho gaya.

    ReplyDelete
  7. sunder drishay chitrit karne me saksham rahi apki rachna lekin dukh hua ki iska side effect as always bura hi raha. :)

    ReplyDelete
  8. Saara manzar aankhon ke aage tair gaya!

    ReplyDelete
  9. अक्सर ऐसा ही होता है..
    जब हमारी दृष्टि दूसरों पर होती है तो हमारी अपनी ज़रूरतें,
    ज़रुरत की चीज़े और ज़रूरी बातें नज़रन्दाज़ हो जाती है...चाय तो बड़ी छोटी चीज़ है...!!

    इसलिए हम चाय गरम पियें और दूसरों की खिड़की-दरवाज़ों पर नज़र कम रखें..!!
    बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

    ReplyDelete
  10. दूसरों की चाय इतने गौर से देखेंगी तो अपनी चाय तो ठंडी होनी ही है...अच्छा खाका खींचा है...पूरा दृश्य उकेर डाला...

    ReplyDelete
  11. सच कहती सुन्दर रचना...

    ReplyDelete
  12. सारी तस्वीर आँखों के आगे ही तैर गयी

    ReplyDelete
  13. हाँ सचमुच ऐसा लगा सबकुछ आँखों के सामने घट रहा है... आधुकिता सभी तरफ व्याप्त है... सुन्दर रचना...

    ReplyDelete
  14. आफ्टर-इफेक्ट' तो देखिये
    मेरे सामने रखी
    गर्म चाय,
    बिना पीये
    खामखा
    ठंढी हो जाती है....

    अब इसका आफ्टर इफेक्ट तो यही होना था । बेहद सुंदर और सच्ची प्रस्तुति ।

    ReplyDelete
  15. मृदुला जी इसे कहते है साइड इफेक्ट :):)

    ReplyDelete
  16. आदरणीया मृदुला जी गजब का चित्रण पाश कालोनी का और अंत हंसाने और सोचने वाला ऐसा ही होता है साइड और आफ्टर इफेक्ट ....आइये बचें अधिक उधेड़ बुन से ..सुन्दर
    शुक्ल भ्रमर ५
    और........इसी उधेड़-बुन में
    उस 'साइड-इफेक्ट' का
    'आफ्टर-इफेक्ट' तो देखिये
    मेरे सामने रखी
    गर्म चाय,
    बिना पीये
    खामखा
    ठंढी हो जाती है..........

    ReplyDelete
  17. आपके साइड इफेक्ट का आफ्टर इफेक्ट ..वाकई अच्छा लगा.

    ReplyDelete
  18. अरे अपनी चाय क्‍यों ठण्‍डी कर डाली। लेखक की बस यह कमजोरी है, दूसरे का हाल देखते देखते खुद की दुर्गति बना लेता है। बहुत ही बढिया कविता, आनन्‍द आ गया।

    ReplyDelete
  19. आज के बदलते जीवन का क्या खूब चित्रण किया है …………बेहतरीन सोच को दर्शाती रचना।

    ReplyDelete
  20. saty ko paribhashit kiya hai aapne.. achchhi rachna..

    ReplyDelete
  21. ओह ! साइड इफेक्ट ने तो आपका ही संडे बिगाड़ दिया... एक कप और सही...

    ReplyDelete
  22. अरे उस तरफ देखना ही क्यों.जहाँ देखने से अपनी चाय हि ठंडी हो जाये:)
    सरल सहज पर गहन अभिव्यक्ति.

    ReplyDelete
  23. बहुत उम्दा और सार्थक प्रस्तुति! बधाई !

    ReplyDelete
  24. पॉश कालोनी का सजीव चित्र.

    ReplyDelete
  25. बेहतरीन प्रस्तुति....सजीव रचना...

    ReplyDelete
  26. शनिवार की रात का
    'साइड -इफेक्ट'
    साफ़ नज़र आता है
    baar baar alsaayaa saa
    ubaasee letaa
    man hee man sochtaa
    raat jyaadaa ho gayee
    aaj se kam piyegaa.....

    sundar chitran,yathaarth
    badhaayee

    ReplyDelete
  27. बहुत सुन्दर।

    कृपया इस लेख को बिल्कुल न पढ़े।

    "किलर झपाटे पर मर मिटी बेचारी दिव्या ज़ील"

    http://killerjhapata.blogspot.com/2011/11/blog-post.html

    धन्यवाद।

    ReplyDelete
  28. आपका ब्लॉग भी बहुत ख़ूबसूरत और आकर्षक लगा । अभिव्यक्ति भी मन को छू गई । मेरे पोस्ट पर आपका स्वागत है । धन्यवाद . ।

    ReplyDelete
  29. बेहतरीन प्रस्तुति...नज़ाकत भरी चाय...

    ReplyDelete
  30. chalchitra ki bhaanti ye drishya aankhon ke saamne se gujar gaya. jaane itni nafaasat ke baad chaaye pine mein wo maza mil pata ki nahin jo maza chaaye ko bhagaune mein khaula kar fatafat pine mein hota hai. par ye bhi unki mazburi, aisa karna hin hota hoga. bahut achchha laga padhna. aabhar.

    ReplyDelete
  31. isi thndi chay ki pyali se itni jbrdst kvita nikli jo bina ruke ek sans me pdhne ko mjboor kr gai . aapka poora blog achchhi trh mnn kr lu to fhoon kroongi .

    ReplyDelete
  32. सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ लाजवाब रचना लिखा है आपने! बधाई!
    मेरे नये पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/

    ReplyDelete
  33. सुंदर प्रस्तुति,.मन को छु गई आपकी ये रचना,
    मेरे पोस्ट में स्वागतहै,....

    ReplyDelete
  34. wah bahut khoob ..sunder side effect .........suru se aant tak baas anand hi aanand ..........se bhara eah side effect . sunder prastuti . badhai

    ReplyDelete