Wednesday, June 13, 2012

सूर्यास्त कहते हैं हुआ.....

रंग की दहलीज पर 
उड़ती 
गुलालों की फुहारें,
लाल,पीली,जामनी
पनघट,
कनक के हैं किनारे.
दूर नभ के 
छोर पर,घट स्वर्ण का 
पानी,सिन्दूरी,
सात घोड़ों के सजे  
रथ से,किरण 
उतरी सुनहरी.
स्वर्ण घट में भरी लाली,
धूप थाली में 
सजा ली,
छितिज का आँचल 
पकड़कर 
एक चक्का लाल सा,
हौले से 
नीचे को गया,
'सूर्यास्त'
कहते हैं हुआ.

Sunday, June 10, 2012

'सूर्योदय' हुआ......

सात घोड़ों ने कसी 'जीनें'
कि 
किरणें कसमसायीं,
झील में जैसे किसी ने 
घोल दी,
जी भर ललाई.
पिघलती 
सोने कि नदियों 
पर,पड़ी आभा गुलाबी, 
फालसई चश्में में ज्यों 
केशर मिला दी.
इन्द्रधनुषी रंग में 
चमकी 
चपल-चंचल किरण, 
एक चक्का लाल सा 
हौले से 
ऊपर को उठा,
कहते हैं......
'सूर्योदय' हुआ.

Thursday, June 7, 2012

सोलवां साल.......

मुझसे किसीने कहा, 'मेरी 'ग्रैंड=डॉटर' का सोलवां साल शुरू होनेवाला है.....आप मेरी ओर से  कुछ लिख दीजिये' तो अपनी समझ के अनुसार यही लिख पाई . अब आज के सन्दर्भ में पता नहीं ये कितना सही है ?

सोलवां साल 
यानि 
एक जादू ,
एक आकर्षण,
एक निमंत्रण,
कुछ  अलग सा 
मिजाज़........
तो  मेरी बच्ची,
अब करनी होगी तुम्हें 
अपने ही 
कदमों की पहरेदारी 
समझदारी से,
कि
दुनियादारी में 
प्रलोभन,
कम नहीं.
सशक्त मन से 
उज्जवल भविष्य का 
आह्वान करना,
शालीनता से,विनम्रता से,
प्रभु का 
ध्यान करना,
कहना.......
तुम्हें विद्या,बुद्धि,विवेक से 
आभूषित के दें,
कहना........
तुम्हें धैर्य से,प्रेम से,विश्वास से 
आलोकित कर दें.........

Sunday, June 3, 2012

मौसम की रखवाली करेंगे.......

नीम का एक पेड़ 
बाहर के, ओसारे से लगे 
तो
गर्मियों के दिन में 
उसकी छांव में 
बैठा करेंगे.....
कड़ी होगी धूप 
जो 
जाड़ों में सर पर,
नीम की डाली से 
हम 
पर्दा करेंगे.......
पतझड़ों में सूखकर
पीले हुए पत्ते,
'ओसारे- लॉन' पर 
जब 
आ बिछेंगे,
सरसराहट सी उठेगी 
हवा सरकाएगी जब-तब, 
मर्मरी आवाज़ 
आएगी, जो 
पत्तों पर चलेंगे.....
हर वक्त कलरव 
कोटरों में, पक्छियों का 
किसलयों के रंग पर 
कविता करेंगे......
नीम का एक पेड़ 
बाहर के ओसारे से लगे 
तो 
हम सुबह से शाम तक 
मौसम की 
रखवाली करेंगे.......

  

Saturday, May 12, 2012

वह ममता.......

वह ममता कितनी प्यारी   थी ,
वह आँचल कितना सुन्दर था,
जिसके   कोने  की    गिरहों में
थी  मेरी   ऊँगली बंधी     हुई .
तब ........
बित्ते       भर   की खुशियाँ थी,
ऊँगली   भर की    आकांछा थी,
उस आँचल की   उन गिरहों में
बस,अपनी सारी दुनिया    थी.....

Tuesday, May 8, 2012

ओहि दिन सभा सँ अबैत काल.......[मैथिली में]

ओहि दिन 
सभा सँ अबैत काल
ओझा भेटैलाह..
कहय लगलाह-
'मैथिल बजैत छी त 
मैथिली में किये नईं 
लिखैत छी ?
एतवा सुनितहि
कलम जे सुगबुगायेल से  
रुकबाक
नामें नईं लईत अछि 
किन्तु 
बचपन में सुनल 
दु-चारि टा 
शब्द क प्रयोग सँ 
कि कविता लिखल 
संभव थिक?
सैह भावि,जुटावय लगलौं
डायरी में,
छोट-बड़ नाना प्रकारक बात.
कुसियारक खेत,
इजुरिया रात,
भानस घर त 
भगजोगनि'क  बात.
नेना-भुटका  के  
धमगज्जड़ में 
कोइली क बोली 
सुनै लगलौं ,
भिन्सहरे उठि क 
एम्हर-ओम्हर टहलै लगलौं.
बटुआ में राखी क 
सरौता-सोपारी,
हाता में बैस क 
तकैत छी फुलवारी.
सेनुरिया आमक रंग,
सतपुतिया बैगन क बारी, 
चिनिया केरा क घौड़ 
गोबर क पथारि.
पाकल अछि कटहर,
सोहिजन जुआएल अछि 
ओड्हुल-कनैल बीच 
नेबो गमगमायेल अछि.
किन्तु 
कविता क बीच में 
ई सभक कि प्रयोजन?
अनर्गल बात सँ 
ओझा बिगडियो जैताह,
थोर-बहुत जे इज्जत अछि 
सेहो उतारि देताह.
गाय-गोरु,
कुक्कुर-बिलाड़
सभक बोलियो क बारे में 
लिखल जा सकैत छई
किन्तु 
से सब पढय बाला चाही,
सौराठक मेला क प्रसंग लिखू त 
बुझै बाला चाही.
कखनों हरिमोहन झा क 
'बुच्ची दाई 'आ 'खट्टर कका' क 
बारे में सोचैत छि त 
कखनों 
'प्रणम्य देवता' क चारोँ
'विकट-पाहुन के 
ठाढ़ पबैछी,
कखनों लहेरियासराय क 
दोकान में 
ससुर-जमाय-सार क बीच 
कोट ल क तकरार त 
कखनों होली क तरंग में 
'अंगरेजिया बाबु 'क  श्रृंगार. 
सभ टा दृश्य 
आंखि क आगे,
एखन पर्यन्त 
नाचि रहल अछि .
'कन्यादान' सँ ल क 
'द्विरागमन' तक 
खोजैत  चलैछी 
कविता क सामग्री,
अंगना,ओसारा,इंडा.पोखरी 
चुनैत चलैत छी 
कविता क सामग्री.
शनैः शनैः 
शब्दक पेटारी
नापि-तौलि क 
भर रहल छी,
जोड़ैत-घटबैत,
एहिठाम -ओहिठाम 
हेर-फेर 
करि रहल छी.
जाहि दिन 
अहाँ लोकनिक  समक्छ 
परसये जकां किछ 
फुईज  जायेत,
इंजुरी में ल क 
उपस्थित भ जाएब.....
यदि कोनों भांगठ रहि जाये त 
हे मैथिल कविगण,
पहिलहीं
छमा द दै जायेब.




Thursday, May 3, 2012

कि.....मैं तुम्हें......

मैं अपनी पलकों पर 
तुम्हारे 
इशारों के जाल 
बुनता हूँ......
तुम्हारे 
ख्वाबों की  उड़ान  में 
साथ-साथ 
उड़ता हूँ.......
सहेजता हूँ  तुम्हारी 
मिठास,
मन  के  कोने-कोने  में
कि.....मैं  तुम्हें
बेहद प्यार करता हूँ