Saturday, March 7, 2020
Thursday, July 6, 2017
उम्र ..
मैं ..
जगह-जगह
बिताये हुये समय की
एक लम्बी
फ़ेहरिस्त बनाती गयी..
और ..
इस जोड़ -घटाव
गुणा-भाग के
हिसाब -किताब में
उम्र , खरीद-फ़रोख्त
करती हुई
चुपचाप निकलती गयी..
जगह-जगह
बिताये हुये समय की
एक लम्बी
फ़ेहरिस्त बनाती गयी..
और ..
इस जोड़ -घटाव
गुणा-भाग के
हिसाब -किताब में
उम्र , खरीद-फ़रोख्त
करती हुई
चुपचाप निकलती गयी..
Saturday, July 1, 2017
..और तुम्हारी याद आयी है
आज बगीचे के उस कोने में
कुछ पीले
फूल खिले हैं ..और
तुम्हारी याद आयी है ..
आज आसमानों को छूता
चिड़ियों का
एक झुण्ड उड़ा है..और
तुम्हारी याद आयी है ..
आज हवा के साथ
बड़ी मीठी सी
कोई गंध उड़ी है ..और
तुम्हारी याद आयी है ..
कुछ पीले
फूल खिले हैं ..और
तुम्हारी याद आयी है ..
आज आसमानों को छूता
चिड़ियों का
एक झुण्ड उड़ा है..और
तुम्हारी याद आयी है ..
आज हवा के साथ
बड़ी मीठी सी
कोई गंध उड़ी है ..और
तुम्हारी याद आयी है ..
Friday, September 9, 2016
नींद की उगाही ..
आज..
नींद की उगाही पर
चलते हैं ..
रह गयी थी जो
जरा सी बेध्यानी में
कुर्सी के हथ्थों पर ..
जल्दबाज़ी में थोड़ी सी
पुराने सोफे के
गद्दों पर ..
आँगन में धूप से
पटी चारपाई पर
ठहर गयी थी ..
चौखट से लगी
चटाई पर
बिखर गयी थी ..
जिम्मे जो लगाई थी
खिड़की पर
हवा को एक रोज़..
रखी थी रास्ते लिये
सामान के साथ
जो चलते वख़्त ..
साँझ की जुगाली में
जुटे हुये
लम्हों से ..
और ..
पलकों को घेरकर बैठी हुई
तीसरे पहर के
उजालों से ..
नींद की उगाही
करते हैं ..
आज..
नींद की उगाही पर
चलते हैं ..
नींद की उगाही पर
चलते हैं ..
रह गयी थी जो
जरा सी बेध्यानी में
कुर्सी के हथ्थों पर ..
जल्दबाज़ी में थोड़ी सी
पुराने सोफे के
गद्दों पर ..
आँगन में धूप से
पटी चारपाई पर
ठहर गयी थी ..
चौखट से लगी
चटाई पर
बिखर गयी थी ..
जिम्मे जो लगाई थी
खिड़की पर
हवा को एक रोज़..
रखी थी रास्ते लिये
सामान के साथ
जो चलते वख़्त ..
साँझ की जुगाली में
जुटे हुये
लम्हों से ..
और ..
पलकों को घेरकर बैठी हुई
तीसरे पहर के
उजालों से ..
नींद की उगाही
करते हैं ..
आज..
नींद की उगाही पर
चलते हैं ..
Saturday, September 3, 2016
नारी सशक्तिकरण ..
जहाँ एक ओर इतने ज़ोर-शोर के साथ नारी सशक्तिकरण की बातें होती हैं ..वहीं दूसरी ओर
अखबार में लड़कियों के लिये वैवाहिक विज्ञापन देते समय हर शैक्षणिक योग्यता के बाबजूद complexion- fair,
Very fair और कभी-कभी तो milky white तक लिख देना ..
शादी के लिये लड़की ढूँढते समय हर गुण के ऊपर गोरे रंग को प्राथमिकता देना ..
गोरे होने के लिये ब्यूटिशियन के यहाँ तरह-तरह के उपचार करबाना..और
बाज़ार में गोरे होने के लिये भाँति-भाँति के प्रसाधनों का मिलना और तेज़ी से उनकी खपत होना..
क्या स्त्री को कमज़ोर नहीं बनाती है ? इस मानसिकता के साथ स्त्री सशक्त हो पाती है क्या ?
Wednesday, March 23, 2016
हम स्नेहक पात पर .......( मैथिली )
हम स्नेहक पात पर
सौगात ल क
आयल छी ,
चैत के चंचल हवा
आर
कुसुमी रंग
ल आयल छी .....
हम किरण असमान सँ
धरती सँ
दूभी -धान लय
गीत सागर के लहर सँ
भ्रमर सँ
मधुपान लय......
खीच क मधु
यामिनी सँ , चाँदनी सँ
ज्योत्स्ना
झिलमिलाहट हम
तरेगन सँ उड़ा
ल आयल छी .......
हम स्नेहक पात पर
सौगात ल क
आयल छी .......
रंग गुलाल , अबीरक झोली
श्याम संग
कनुप्रिया के होली
खेलि रहलि छथि
बारि - दुआरि
हर्ष उमंगक
रस में घोली,
अनुपम छवि सँ
प्रीति माँगि कय
आज एतय
ल आयल छी ......
हम स्नेहक पात पर
सौगात ल क
आयल छी ........
फाग मचल , उमगल
अंगना - घर
धूम उठल रसिया के
रघुबर कर पिचकारी
भरल अछि
रंग सँ अंग सिया के.....
अद्भुद रूप छटा
सम्मोहन
वैह फुहार ल
आयल छी ......
हम स्नेहक पात पर
सौगात ल क
आयल छी ......
चैत के चंचल हवा
आर
कुसुमी रंग
ल आयल छी......
सौगात ल क
आयल छी ,
चैत के चंचल हवा
आर
कुसुमी रंग
ल आयल छी .....
हम किरण असमान सँ
धरती सँ
दूभी -धान लय
गीत सागर के लहर सँ
भ्रमर सँ
मधुपान लय......
खीच क मधु
यामिनी सँ , चाँदनी सँ
ज्योत्स्ना
झिलमिलाहट हम
तरेगन सँ उड़ा
ल आयल छी .......
हम स्नेहक पात पर
सौगात ल क
आयल छी .......
रंग गुलाल , अबीरक झोली
श्याम संग
कनुप्रिया के होली
खेलि रहलि छथि
बारि - दुआरि
हर्ष उमंगक
रस में घोली,
अनुपम छवि सँ
प्रीति माँगि कय
आज एतय
ल आयल छी ......
हम स्नेहक पात पर
सौगात ल क
आयल छी ........
फाग मचल , उमगल
अंगना - घर
धूम उठल रसिया के
रघुबर कर पिचकारी
भरल अछि
रंग सँ अंग सिया के.....
अद्भुद रूप छटा
सम्मोहन
वैह फुहार ल
आयल छी ......
हम स्नेहक पात पर
सौगात ल क
आयल छी ......
चैत के चंचल हवा
आर
कुसुमी रंग
ल आयल छी......
Friday, March 4, 2016
टेलीफोन विभाग ......
आज जब लोग इंटरनेट और मोबाईल से इतने बंधे हुये हैं कि इनकी रफ़्तार जरा सी भी धीमी हो जाये तो परेशान हो जाते हैं...... तब मुझे कलकत्ते का 1986 वाला समय बरबस ही याद आने लगता है ......जब हम पूरी तरह से टेलीफोन पर ही निर्भर थे .....वो भी प्राइवेट कंपनीज की नहीं , सिर्फ भारत सरकार के टेलीफोन विभाग पर ......तो आज उसी समय की लिखी हुई और वहीँ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के मंच पर सुनायी हुई एक कविता आपको सुना रही हूँ...... ( खास बात ये कि उस समय मेरे पति चीफ जेनरल मैनेजर , ईस्टर्न टेलीकॉम रिज़न थे )
टेलीफोन विभाग के
वरिष्ठ अधिकारी के घर
छह महीने
दौड़ने के बाद
एक साहब के घर
फोन लग गया.....
साहब हुये खुश
उठाया चोंगा लगाया नंबर
पर ये क्या ?
न डायल टोन , न आवाज़
ख़ामोशी का
साम्राज्य....
साहब आ गये
सकते में
कैसा ये चक्कर
पहुँच गये सर के बल
अधिकारी के दफ्तर ......
कॉल-बेल दबाया तो
पी. ए. बाहर आया
नाम काम पूछकर
अंदर पहुँचाया .....
अधिकारी ने कहा , बुलाओ
पी. ए. ने कहा , आओ
इस प्रकार साहब ने
अंदर प्रवेश पाया....
अधिकारी ने पहचाना , कहा
कैसे हुआ आना ?
साहब कुछ घबराये
थोड़ा सकपकाये
कई बार सर को
इधर-उधर घुमाये
फिर बड़ी विनम्रता से
बोले शालीनता से -
सर , फोन तो लग गया
पर.....
डॉयल टोन नहीं आया .....
अधिकारी कुछ गम्भीर हुये
बिना अधीर हुये
मेज़ की दराज़ को खिसकाया
लाइटर निकालकर
सिगरेट को जलाया.....
दो-चार लम्बे कश लेकर
पेशानी पर कुछ
बल देकर
थोड़ा गरमाये......फिर
धीरे से फ़रमाये -
' टेलीफोन और डॉयल टोन में
आपसी सम्बन्ध है '
आपलोगों को ये
ग़लतफ़हमी है........और फिर
हमारे पास
इन दोनों की कमी है
इसीलिये सरकार ने
नया तरीका अपनाया है
किसीको टेलीफोन
किसीको डॉयल टोन
यही हुक्मनामा
आया है ......
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