दिल से दिल तक के
रस्ते पर
भारी,ट्रैफिक जाम लगा है.……
हर्ष-विषादों की
जमघट है,
सही-गलत की
तख्ती है,
चुप्पी की आवाज़
घनी है
अहंकार की
सख्ती है.……
नाराज़ी की भीड़-भाड़ में
तरल गरल की
हलचल है,
चढ़ा मुलम्मा छल पर
निकला,
जिसमें जितना
बल है…….
झूठ-शिकायत की
पेटी है,
इल्ज़ामों के दश्ते हैं,
राजनीति की सधी
चाल से
टूटे-बिखरे
रिश्ते हैं.…….