Thursday, March 12, 2020

वो जो ..

वो जो मुश्किलों का दौर था
कुछ इस तरह से गुजर गया
कि जो साँस थी चलती रही
मेरी नब्ज़ पर वो ठहर गया ..

आँखें  समन्दर  हो   गयीं
दिल छुप गया जाने कहाँ
वो  दरअसल  मेरी ज़ीस्त
मेरी दास्ताँ ही बदल गया ..

3 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शुक्रवार 13 मार्च 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. बहुत सुन्दर

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