Sunday, March 8, 2020

प्रिय..

प्रिय
जब मैं तुमसे दूर रहूँ
तुम मन-ही-मन में
मन-से-मन की
कह लेना
मैं सुन लूँगा ..

प्रिय साँझ ढ़ले
आँगन में
रजनीगंधा की कलियाँ
निज हाथों से
बिखरा देना
मैं चुन लूँगा ..

प्रिय तम में
पलकों पर तुम
सुन्दर सपनों को लाना
लेकर अपनी
आँखों में
मैं बुन लूँगा ..

प्रिय
जब मैं तुमसे दूर रहूँ
तुम मन-ही-मन में
मन-से-मन की
कह लेना
 मैं सुन लूँगा ..

13 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज सोमवार 09 मार्च 2020 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. बहुत ही सुंदर .... एक एक पंक्तियों ने मन को छू लिया ...

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  3. बहुत दिनो के बाद आपको लिखते देखकर खुशी हुई।

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    1. यहाँ हम लोगों का आना फिर से आरम्भ हुआ .. खुशी की बात ..

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  4. वाह ! होली पर प्रीत की बौछार !

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    1. कितने दिनों बाद आपको देखी .. बहुत अच्छा लगा ..

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  5. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शुक्रवार (13-03-2020) को भाईचारा (चर्चा अंक - 3639) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    *****
    आँचल पाण्डेय

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद ..

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  6. प्रीत के तार मन से मन को जोड़े रखता है।
    बहुत लाजवाब रचना।
    नई पोस्ट - कविता २

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