कलियों ने तड़के
दरवाज़े को खड़काया,
भंवरों का गुनगुन
सीधा
कानों में आया,
साथ हवा के
मीठी-मीठी खुशबू
आयी,
पेड़ों की हर शाखों ने
हलके से
किसलय को सहलाया.
कहो-कहो
क्या बात आज
तो
साथ सभी ने गाया......
तुम भी गाओ
'अमल-पुष्प' का
जन्म-दिवस है आया.
(आपकी जिज्ञासा के लिए बता दूं कि 'अमल-पुष्प' मेरे दामाद का नाम है)
दरवाज़े को खड़काया,
भंवरों का गुनगुन
सीधा
कानों में आया,
साथ हवा के
मीठी-मीठी खुशबू
आयी,
पेड़ों की हर शाखों ने
हलके से
किसलय को सहलाया.
कहो-कहो
क्या बात आज
तो
साथ सभी ने गाया......
तुम भी गाओ
'अमल-पुष्प' का
जन्म-दिवस है आया.
(आपकी जिज्ञासा के लिए बता दूं कि 'अमल-पुष्प' मेरे दामाद का नाम है)